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| वो बुद्धू पिद्धू सा लड़का |
♪खामोशी की किताब लिए वो कल्लास में लास्ट ब्रेंच पर बैठा करता
डरा डरा सा बुझा बुझा वो टीचर को देखा करता
अक्सर करते सिकायत टीचर उसकी
घर जाकर वो डांटे खाया करता
♪खामोशी की किताब लिए वो कल्लास में लास्ट ब्रेंच पर बैठा करता
वैसे तो वो था लोगों के ! लिए बस बुद्धू पिद्धू
लेकिन बुद्धू भी टिमटिमाते तारों को देख कर मुस्कराता तो चांद को देख कर रोया करता
♪खामोशी की किताब लिए वो कल्लास में लास्ट ब्रेंच पर बैठा करता
सब कुछ कह कर भी कहीं चुप ही रहा वो
अपनों में रहकर भी कहीं गुम ही रहा वो
झूंठी हंसी में उदासी छुपाया करता
♪खामोशी की किताब लिए वो कल्लास में लास्ट ब्रेंच पर बैठा करता
सपने थे उसके बड़े-बड़े ! लेकिन पढ़ने लिखने में था थोड़ा कच्चा
रोज जाग कर रातों में कुछ गाने तो कुछ कहानियां लिखा करता
♪खामोशी की किताब लिए वो कल्लास में लास्ट ब्रेंच पर बैठा करता
वो बुद्धू पिद्धू सा लड़का

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