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| raksha bandhan special poem 2019 |
तुम आए जिस दिन इस दुनियां में उस दिन
सायद पहला घर बना होगा।
कहीं नदियां कहीं सागर बना होगा।
जगमगा उठे होंगे तारे आशमा में
और चांद भी कहीं नन्हा रहा होगा।
तुम आए जिस दिन इस दुनियां में उस दिन
सायद पहला घर बना होगा।
झूम उठी होंगी बारिश बेगानों में
कहीं छुपकर बदल से सूरज भी मुस्कुरा दिया होगा
जब पांव रखे होंगे तुमने जमीन पर और
सरारत से रोशनी को पकड़ा होगा
उस दिन सायद सही मायनों में
घर का जैसे मैदान आंगन बना होगा।
तुम आए जिस दिन इस दुनियां में उस दिन
सायद पहला घर बना होगा।
कभी भईया कहकर पुकारा है तुमने
कभी मां बनकर संवारा है तुमने
कभी प्यार बांटकर एक परिवार समेट लिया होगा।
तुम आए जिस दिन इस दुनियां में उस दिन
सायद पहला घर बना होगा।
हर भाई को मिले बहन तुम प्यारी सी
और रहो तुम हमेशा मां पापा की दुलारी सी
आज सुबह तुमने हमको याद किया होगा
हर बार की तरह ,भईया में तुमसे नाराज़ हूं
फिर एक बार गुस्सा जताते हुए कहा होगा
तुम आए जिस दिन इस दुनियां में उस दिन
सायद पहला घर बना होगा।
Raksha bandhan special poem 2019

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