Wednesday, 15 August 2018

तेरे पीछे भागते भागते ज़िन्दगी। जब वक्त के धुंद में कहीं धुंधला गया था। तो तूने पीछे मुड़ कर देखा तो होगा ज़िन्दगी।

तेरे पीछे भागते भागते ज़िन्दगी। जब वक्त के धुंद में कहीं धुंधला गया था। तो तूने पीछे मुड़ कर देखा तो होगा ज़िन्दगी।
तेरे पीछे भागते भागते ज़िन्दगी


तेरे पीछे भागते भागते ज़िन्दगी। जब वक्त के धुंद में कहीं धुंधला गया था। तो तूने पीछे मुड़ कर देखा तो होगा ज़िन्दगी।
तेरे साथ चलते चलते जब रास्तों में हालात के एक पत्थर
से ठोकर खाकर गिर पड़ा था। तो दिल तो किया होगा हाथ
देकर उठाने का ज़िन्दगी। जब रिश्तों के जंगल से गुजरते बक्त
एक नकारे पन का कांटा चुभ गया था। तो दर्द तुझे भी हुआ होगा ज़िन्दगी। जब वो सपना हुआ था आंखों से ओझल
ओर कोई हूख उठी थी सीने मैं। तो कहीं तेरी भी आंखें नम हुई होंगी ज़िन्दगी। तेरे पीछे भागते भागते ज़िन्दगी। जब वक्त के धुंद में कहीं धुंधला गया था। तो तूने पीछे मुड़ कर देखा तो होगा ज़िन्दगी।


तेरे पीछे भागते भागते ज़िन्दगी



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