Sunday, 25 August 2019

नयी उम्मीदें (आखिरी भाग)

नयी उम्मीदें (आखिरी भाग)


. शुबह हुई नितिन ने सबसे पहले माँ से बात करना उचित समझा,उनको समझाया कि चलो मानलो  अगर मैंने आपकी पसन्द की लड़की से शादी कर भी ली तो ज्यादा से ज्यादा क्या होगा सिर्फ दो परिवार रिस्तेदारी के नाते मैं बंध कर रह जायेंगे दिल नहीं , मैं उसको खुश रख पाउँगा मैं खुद कभी रह पाउँगा,और इस ज़माने की लोगों की क्या बात करते हो माँ ,
सदियों से रिश्तों मैं दखल देना खामी निकालना तो इस ज़माने की फ़ितरत रही
है शौक रहा है,स्वभाव रहा है ,लोग आज को याद रखते है, कल को नहीं ,लोग दो चार दिन बातें करेंगे और सब भूल जाएंगे , आखिर कार नितिन के घर वाले इस रिश्ते के लिए मान ही गए ,और मानते भी क्यों क्यों कि आखिर कार हर माँ बाप ताउम्र सिर्फ यही तो चाहते हैं कि उनके बच्चे जहाँ भी रहें जैसे भी रहें खुश रहें , मेहफूज रहें ,
सुख़ सम्रद्धि से रहें, वो जीते ही उनके लिए हैं ,खैर इधर विकाश पोरवाल  के घर वालों को ये
खुशखबरी मिली तो सभी के चेहरे पर एक हल्की सी मुश्कुराहट आगई ,फिर से उसका घर चेह्कती ,महकती ,खिलखिलाती खुशियों से भर गया,विकाश पोरवाल ने अपनी दीदी की शादी बड़ी धूम-धाम से की ,लेकिन कुछ खुशियों के कुछ नन्हे पलों ने उसकी उंगली थामी ही थी ,
लेकिन दीदी की शादी के कुछ महीनों बाद ही उसके सर से उसके पिता का साया बिछड़ गया,
जैसे किसी सुनहरी सुबह को वो चख भी नहीं पाया उससे पहले ही किसी काली घटा ने फिर से बसेरा कर लिया , परिवार वालों ने भी अपना हाथ पीछे खींच  लिया लेकिन बक्त से
हार मानना तो उसने कभी सीखा ही नहीं था ,माँ पापा के गुजर जाने की उदासी उसको कहीं झकझोर ना दे कहीं सिमटा ना दे उसको कहीं कमज़ोर ना करदे, इस लिए उसने अपने आपको पढ़ाई मैं पूरी तरह से झोंक दिया वो चलता ही रहा , ना धूप देखी छावं , दिन देखा रात ,
आखिर इम्तिहान भी उसका इम्तिहान लेते लेते थक गए , ये उजाले कहाँ डरते हैं अंधेरों से बुझते भी हैं जलते भी हैं फिर रौशन करते हैं कोई दिल कोई कोहनां कोई जहाँ , आज एक अर्शा होने को है विकाश पोवाल इंडियन रेलवे मैं अफसर है और जब भी माँ पापा को करना होता है तो छत पर जाता है और टिमटिमाते तारों को देख कर हलके से मुश्कुरा लेता है. दोस्तों रस्ते कितने भी क्यों लम्बे हों सफर भी ज़िद्दी होता है एक एक मंज़िल को हांसिल कर ही लेता है



नयी उम्मीदें (आखिरी भाग)


No comments:

Post a Comment