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| नयी उम्मीदें (Part-3) |
जब वो रातों मैं सोता, तो आसमान की बुलंदियों को छूने के सपने देखता,लेकिन उसके जेहन मैं जब घर की ,
परिस्थिति का ख्याल आता, तो उसके मन के आसमान मैं उड़ते चहकते सपने ज़मीन पर आजाते ,
उसके कन्धों पर घर की जिम्मेदारियों का बहुत बोझ था , और उसके पापा तो मेडिकल की दुकान को पहले ही बंद कर चुके थे ,जिससे उनके घर का खर्चा चलता था, और जो कुछ जमापूंजी थी वो उसके पापा घर के खर्चों व शराब मैं कर चुके थे ,घर की परिस्थिति आए दिन ख़राब होती चली जारही थी ,इसी पल विकाश पोरवाल ने सोचा की आखिर कब तक तूफ़ान के थमने का इंतजार करता रहूंगा, मुझे अपनी जिम्मेदारियाँ समझनी होंगी,
और काफी असमंजस के बाद उसके मन मैं बिचार आया, कि क्यों ना पापा की बंद पड़ी दुकान मैं ,एक मोबाइल
रिपेरिंग सेंटर खोला जाये ,फिर क्या था उसने जैसे तैसे खिंच खाँच के कुछ दोस्तों से पैसे उधार लेकर एक छोटी सी दुकान को खोला ,कुछ दिन गिरहाकी कुछ खास नहीं हुई लेकिन जैसे जैसे लोगों को मालूम हुआ वैसे वैसे
दुकान खूब चलने लगी,वो शाम को दुकान बंद करके अपने ख्वाबों की दुकान को खोल लिया करता ,और खूब मन लगाकर देर रात तक पढ़ता,ये मन भी अजीब है,ये आपका तब साथ देता है जब आप उसका साथ देते हो ,खैर जब वो वक्त निकालकर ट्युसन जाता तो आशमान मैं उम्मीदों की किरणों को देखता,वो उम्मीदें जो बचपन से उसके दिल मैं रहती आयीं थीं ,लेकिन एक शाम, जब वो ट्यूशन से घर वापस लोटा ,तो देखा घर पर कुछ मेहमान आये हुए थे,सायद दीदी के रिश्ते के लिए ,दीदी तैयार होकर आयी तो ,लडके के घर वाले दीदी को देखकर आपस मैं कुछ बात चीत करने लगे, और आखिर एक संकोच भरी चुप्पी के बाद बोले, देखिये आपकी बेटी मैं कोई कमी नहीं है,लेकिन हमें ये रिस्ता मंज़ूर नहीं ,और वो उठकर चले गए ,लेकिन जाते बक्त दीदी ने उनकी कुछ बातें सुनली सायद,कि लड़की मोटी है लड़की मैं ये कमीं है लड़की मैं वो कमीं है ,लड़की मैं ये खामी है,और भी बोहोत सारी बातें, विकाश पोरवाल की दीदी रोने लगी थी, विकाश की भी आंखें नम हो आयीं थीं ,आखिर अपनों का दिल तो एक ही होता है ना,उसने अपनी दीदी को कांपते हुए हाथों से कसके गले से लगा लिया,और बोला आप दीदी रोते क्यों हो इसमें आपकी थोड़ी ना गलती है,क्या मैं इतनी बुरी हूँ रोते हुए उसकी दीदी बोली,नहीं दीदी आप तो हमारे लिए दुनियां की सबसे प्यारी दीदी हो और पापा के लिए सबसे अच्छी बेटी भी ,और दीदी आपसे तो कोई भी शादी करने के लिए तैयार हो जायेगा,विकाश पोरवाल अपनी दीदी को छेड़ते हुए बोला ,तो उसकी दीदी भी हलके से मुश्कुरादी, खैर लड़के वाले जा चुके थे लेकिन ,उनके जाने के बाद भी बोहोत कुछ पीछे छूट गया था ,कुछ ऐसी खरोंचें कुछ ऐसी चुभती बातें जिनकी तपिस से विकाश पोरवाल के छोटे से घर मैं ढेर सारी खामोशी फैली रही ,उस रात किसी ने खाना नहीं खाया ,बस देर रात तक रोने की शिसकने की आवाज घर मैं गूंजती रही,लेकिन उधर (नितिन) भी कहाँ चैन से सो पाया था,नितिन वो जिससे विकाश पोरवाल की दीदी की शादी होने वाली थी ,उसके जेहन मैं बार बार उसी लड़की का चेहरा आरहा था उस लड़की की बातों मैं छुपी नर्माहट उसको अंदर से झकजोर थी , वो देर रात तक अपनी छत पर बैठा रहा, उसने ये तय कर लिया था,कि वो सादी करेगा तो सिर्फ उसी लड़की से अन्यथा,ज़िन्दगी में कभी किसी को ख्यालों तक भी नहीं आने देगा !
नयी उम्मीदें (Part-3)

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