आज ये मेरे शहर को हुआ क्या
ये डर कैसा ये खौफ कैसा
ये गलियों की खूबसूरती किसने लूटली
ये असमा से चिड़ियों का चेहचाना किसने छीन लिया
आज वो नुक्कड़ भी सुना क्यों है जहां अक्सर
कुछ यार दोस्त चाय या सिगरेट भूंकने आ जाया करते थे
आज ये बारिश की बूंदों में सभी पेड़ इतने उदाश क्यों
आज ये मेरे देश की ज़मीन भीग भी रही है लेकिन इसमें
कोई नमी क्यों नहीं इसकी तपिश कम क्यों नहीं ।
ये डर कैसा ये खौफ कैसा
ये गलियों की खूबसूरती किसने लूटली
ये असमा से चिड़ियों का चेहचाना किसने छीन लिया
आज वो नुक्कड़ भी सुना क्यों है जहां अक्सर
कुछ यार दोस्त चाय या सिगरेट भूंकने आ जाया करते थे
आज ये बारिश की बूंदों में सभी पेड़ इतने उदाश क्यों
आज ये मेरे देश की ज़मीन भीग भी रही है लेकिन इसमें
कोई नमी क्यों नहीं इसकी तपिश कम क्यों नहीं ।

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