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| *मेरे प्यारे अमित गुरु * |
मेरे लब्ज मेरे अल्फाज हमेशा आपके कर्जदार रहेंगे।
जो ना कर सके बयान गर आज आपकी अच्छाईयों को तो फिर कहाँ कुछ कहेंगे।
मेरे लब्ज मेरे अल्फाज हमेशा आपके कर्जदार रहेंगे।
जो सीखा आपसे और जो सिखाया आपने वो एक दिन फिजा में लिखेंगे।
हर तरफ होगा सोर जहाँ मैं। और बादल भी कुछ गुनगुना रहे होंगे।
मेरे लब्ज मेरे अल्फाज हमेशा आपके कर्जदार रहेंगे।
अक्सर अभिब्यक्त करते हो आप अपने जीवन के किस्सों जज्बातों को
क्लास मैं एक अजब सा माहौल बना देते हो अपने उन धुंदले से खयालातों से
हर ढ़लती शाम की तरह आज भी आपके शागिर्द आपकी ओर खींचे चले आएंगे।
मेरे लब्ज मेरे अल्फाज हमेशा आपके कर्जदार रहेंगे।
एक नन्हें सपने ने चलना सीखा है आपसे कुछ टूटा फूटा लिखना कुछ गुन गुनाना
सीखा है आपसे ,बस यूँही रहे सर पर हाथ आपका , हर बुरे बक्त मैं हो साथ आपका।
हर रूठी मंज़िल मनालेंगे ग़मों को भी हंसी से सजा लेंगे।
मेरे लब्ज मेरे अल्फाज हमेशा आपके कर्जदार रहेंगे।
हम सब हमेशा सहज व नादान ही रहना चाहेंगें हर दिन हर पल हर लम्हा
आपसे कुछ नया कुछ अलग सीखना चाहेंगे।
मेरे लब्ज मेरे अल्फाज हमेशा आपके कर्जदार रहेंगे
शुभ गुरु पुर्णिमा

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